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Showing posts with the label संपादकीय/लेखक के विचार

कोरोना एलर्ट::मुख्य सब्जी मंडी में आये लोगों की हुई थर्मल स्क्रीनिंग, ट्रक ड्राइवरों के नोज़ल थ्रोट के स्वाब के लिये गए सैम्पल

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स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीम ने सुबह पांच बजे से 300 से अधिक लोगों की थर्मल स्‍क्रीनिंग की बाहर से आए हुए ट्रक ड्राइवरों के लिए गए नोजल व थ्रोट के स्‍वाब, भेजे गए जांच के लिए   संतकबीनगर । सप्‍लाई चेन के संक्रमण पर निगरानी के लिए जिलाधिकारी के आदेश पर शुक्रवार को सब्‍जी मण्‍डी में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने जिले की मुख्‍य सब्‍जी मण्‍डी में बाहर से आए हुए लोगों तथा व्‍यापारियों की थर्मल स्‍क्रीनिंग की । इस दौरान बाहर से आए हुए ट्रक ड्राइवरों के नोजल व थ्रोट  के स्‍वाब के सैम्पल लेकर जांच के लिए गोरखपुर मेडिकल कालेज स्थित लैब में भेजे गए । सीएमओ डॉ हरगोविन्‍द सिंह के निर्देशन में जिले में कोरोना के सपोर्टिव सुपरविजन के लिए राज्‍य से नामित चिकित्‍सक डॉ अनिल सिंह, कोरोना रैपिड रिस्‍पांस टीम के प्रभारी डॉ ए के सिन्‍हा, कोरोना रैपिड रिस्‍पांस टीम के सह प्रभारी व एपीडेमियोलाजिस्‍ट ( जिला महामारी रोग विशेषज्ञ ) डॉ मुबारक अली, फार्मासिस्‍ट रितेश श्रीवास्‍तव व नेशनल मेडिकल मोबाइल यूनिट के साथ लैब टेक्‍नीशियन देवेन्‍द्र की टीम सुबह 5 बजे ही जिला मुख्‍यालय पर...

अंबेडकर जयंती-इस कारण से असाधारण शख्सियत थे दलितों के मसीहा डॉ बीआर अंबेडकर

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भारतीय संविधान के निर्माता बीआर अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। बीआर अंबेडकर ने न सिर्फ संविधान का निर्माण किया बल्कि देश की सबसे बड़ी बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बनाने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वो एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे जिन्होंने भारत में दलित बौद्ध आंदोलन चलाया। बचपन से ही बीआर अंबेडकर दलितों की स्थिति को लेकर चिंतित थे। एक दलित बच्चा होने के कारण उन्होंने देखा था कि किस तरह दलित बच्चों और दूसरे बच्चों में भेदभाव किया जाता था। 1956 में उन्होंने समाजिक और राजनीतिक आंदोलन दलित बौद्ध आंदोलन चलाया। इसमें भारत के लाखों दलित लोगों ने हिस्सा लिया। उन्हें 31 मार्च 1990 को मरणोपरांत बीआर अंबेडकर को भारत रत्न दिया। बाबासाहेब का जीवन सचमुच संघर्ष और सफलता की ऐसी अद्भुत मिसाल है जो शायद ही कहीं और देखने को मिले। हर साल 11 करोड़ लोग भीम जयंती के महोत्सव में भाग लेते हैं। इस साल कोविड 19 लॉकडाउन के चलते लोग घर में रहेंगे। 1906 में अंबेडकर की शादी 9 साल की लड़की रमाबाई से हुई। उस समय अंबेडकर की उम्र महज 15 साल थी। उस समय देश में बालविवाब कराए ज...

यह मरकज से निकली कैसी जमात है?  उजड़ रहा चमन और बिखरी हयात है

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गत 25 मार्च को जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उपराज्यपाल अनिल बैजल के साथ देश में लागू लाॅकडाऊन पर एक संवाददाता सम्मेलन कर रहे थे! तब उन्होने दिल्ली राज्य के लोगों को आशस्वत करते हुये कहा कि दिल्ली के लोगों को लाॅकडाऊन में घबड़ाने की जरुरत नहीं है! दिल्ली की सरकार विपदा की इस घड़ी में उनके साथ खड़ी है और किसी प्रकार की जरुरत की चीजों और रसद की कोई कमी नहीं आगे देगी! केजरीवाल ने इसके साथ ही बड़े आत्म विश्वास के लहजे में दिल्ली की जनता को संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से कहा कि यह बहुत ही अच्छी खबर है कि गत 40 घण्टों में दिल्ली के अंदर करोनो वायरस से संक्रमित कोई मामला नहीं आया है! ऐसा कहते समय वे इसका श्रेय खुद या अपनी सरकार को देते दिखे, मानो वे कह रहे थे कि हमारी सरकार की मुस्तैदी के कारण ही कोई मरीज 40 घण्टों में नहीं आया! मगर मुख्यमंत्री केजरीवाल की ये खुशी मात्र कुछ घण्टों में उस समय उड़ गई, जब 29 मार्च को साउथ दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन थाने की एन नाक नीचे मौजुद अलामी मरकज बंग्लेवाली मस्जिद में से करीबन 1500 तब्गीली जमातियों को पुलिस ने जबरन निकाला! जब इन जमातियों का टेस्ट...

सिविल सेवा की प्रारम्भिक परीक्षा सरल है या कठिन,

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जान‍िये, क‍ितना मुश्‍क‍िल है प्रारंभ‍िक परीक्षा क्‍वाल‍िफाई करना UPSC IAS Pre Exam 2020: यूपीएससी स‍िव‍िल सेवा प्रारंभ‍िक परीक्षा के ल‍िये आवेदन की प्रक्र‍िया शुरू होने जा रही है. मई में इसकी परीक्षा होगी. जान‍िये यह परीक्षा पास करना क‍ितना आसान है या क‍ितना मुश्‍क‍िल है. सिविल सेवा की प्रारम्भिक परीक्षा सरल है या कठिन, इस बारे में दो परस्पर विरोधी विचार हैं. ज्यादातर लोग इसे सरल मानते हैं. जबकि कुछ को यह कठिन मालूम होती है. सरल मानने वालों को लगता है कि प्रश्‍नों के उत्‍तर तो दिये ही रहते हैं और यदि हमने उस विषय को पढ़ा है, तो विकल्पों को देखने के बाद उत्‍तर पकड़ में आ ही जाएंगे. इसमें अपनी ओर से कुछ लिखना भी नहीं होता है. इसलिए यह सरल है. सरल इसलिए भी है कि यदि किसी तरह 55 प्रतिशत स्कोर आ जाए, तो सिलेशन पक्का है और इतना लाना मुश्‍क‍िल नहीं होता. सरल मानने वाले में ये अधिकांश वे लोग होते हैं, जो अभी तक प्री में बैठे नहीं हैं. लेकिन जो बैठ जाते हैं, वे अब इसे इतना सरल नहीं मानते. सरल होने के लिए पहले वे जो-जो कारण देते थे, अब वे वही-वही कारण इसके कठिन होने के लिए देने लगते हैं. अब उन्हे...

सरकार की नींद उड़ाता शाहीन बाग आन्दोलन-श्रीगोपाल गुप्ता

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 देश की राजधानी दिल्ली के दक्षिणी भाग में स्थित शाहीन बाग में सरकार द्वारा पारित नागरिक संसोधन एक्ट (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी ) के विरोध में 40 दिनों से चल रहे धरना प्रदर्शन से सरकार और भारतीय जनता पार्टी की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ने लगा है!चालीस दिनों से विशुद्ध महिलाओं द्वारा चलाये जा रहे इस गांधीवादी मगर व्यस्थित आंदोलन ने सरकार को हलकान कर रखा है! दिल्ली विधानसभा के चुनाव के दौरान चल रहे इस शांति प्रिय आंदोलन के कारण भाजपा के लिये जहां दिल्ली फतह करने में रोड़ा बनता जा रहा है वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार भी इससे निपटने में अब तक असफल साबित हो रही है!बिना किसी राजनीतिक दलों व नेताओं के दिन-प्रतिदिन तेजी से आगे बढ़ता जा रहा ये शाहीन बाग का महिलाओं का आंदोलन पूरे देश को आहिस्ता-आहिस्ता अपनी मजबूत पकड़ में ले रहा है नतिजन देश के कई हिस्सों में लोग इससे प्रेरणा लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठ गये हैं!कलमकार पंडितों के अनुसार यह धरना देश का अब तक सबसे बड़ा धरना प्रदर्शन है जो सन् 2011 के अन्ना हजारे के आंदोलन से भी बड़ा है और अचरज इस बात पर है कि हमेश...

कोटा में जन्मजात बच्चों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन ?

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इस समय कोटा शहर का नाम चर्चा में है | अख़बार हो या टी वी शहर का नाम ख़बरों में छाया रहता है | चर्चा का   कारण है कोटा के जे.के. लोन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय एवं न्यू मेडिकल कॉलेज में बच्चों की  लगातार बढ़ती मौत का आंकड़ा  | मामला तूल पकड़ने के बाद सरकार हरकत में आई है और अस्पताल के सुपरिटेंडेंट को हटा दिया है साथ भी हाई लेवल जांच के आदेश दे दिए गए हैं| बात अगर संख्या की हो तो पिछले 5 दिनों को मिलाकर अब तक 100   औ र हर साल में 1000  बच्चे काल के ग्रास में समा रहे  हैं| एक ऐसे समय में जब भारत को विश्व गुरु बनाने की बातें अपने चरम पर हो. बहस का मुद्दा इंडिया का न्यू इंडिया बनना हो |सवाल है कि बच्चों की मौत के बाद आखिर क्यों सरकार की कान पर जूं तक न रेंगी? क्यों इन मौतों की अनदेखी हुई? मासूम बच्चों की मौत को एक गंभीर मामला मानते हुए इसपर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? कहीं ऐसा तो नहीं कि यूपी , बिहार  से लेकर राजस्थान तक इस देश की अलग अलग सरकारें इस बात को पहले ही मान चुकी हैं कि ये गरीब के बच्चे हैं| इन बच्चों का मर जाना ही बेहतर है! मामला मीडिया से लेकर सोश...

नहीं पहुँच पा रहै हैं आम जनता तक नागरिकता संशोधन कानून के सही मायने- अशोक भाटिया

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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर आम जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए भाजपा ने एक अभियान शुरू करने का जो फैसला किया वह देर से उठाया गया कदम ही दिखता है। कायदे से यह काम तो अब तक हो जाना चाहिए था। पार्टी के साथ मोदी सरकार को भी आम जनता से संपर्क-संवाद की जरूरत तभी समझ लेनी चाहिए थी जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नागरिकता कानून पर व्यापक प्रचार-प्रसार की दरकार है। दरअसल नागरिकता संशोधन कानून देश के नागरिकों एवं अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ नहीं है, कम से कम पढ़े लिखे लोग पढ़कर समझ ही विरोध करें। विरोधी एवं उत्पाती लोगों का दिल बड़ा है अच्छी बात है । यदि आपको घुसपैठियों से दिक्कत नहीं तो उन बेचारे सैनिकों की बलि देने की क्या जरूरत है जो बॉर्डर पर तैनात हैं। सारे बॉर्डर खोल देने चाहिए ना? इतना बड़ा दिल है तो अपने घरों के दरवाजे भी छोड़ दीजिए खुले, सर्दी का मौसम है फुटपाथ पर सोने वाले लोग आराम से आकर सोएं घरों में। जब आप अपना घर खुला नहीं छोड़ सकते तो राष्ट्र को घुसपैठियों के लिये कैसे खुला छोड़ सकते हैं? कॉलेज स्टूडेंट का क्या मतलब है विरोध करने का? सड़कों पर उतरने का? बसें फूंकने का? विरोध का क्या यही...