यूपी सहित कई राज्यों के एजेंसी मालिकों ने खुद ही खरीद लिए हजारों Bs4 वाहन !
गोरखपुर.। कोरोना वायरस (Corona virus) के चलते पूरे देश में 3 मई तक लॉकडाउन (Lockdown) घोषित है. ऐसे में किराना और मेडिकल स्टोर्स को छोड़कर बाकी सभी दुकानें बंद हैं. इसका असर व्यवसाय पर भी पड़ा है. बहुत सारी कंपनियां और दुकानदार घाटे में चल रहे हैं, क्योंकि दुकानें बंद होने के चलते माल की बिक्री नहीं हो रही है. इसी बीच उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां पर एजेंसी के मालिकों ने शोरूम में खड़े हजारों बीएस- 4 वाहन (BS-4 vehicle) अपने फर्म, कर्मचारी और करीबीयों के नाम पर ही खरीद डाले. इन वाहनों में बीएस-4 बाइक की संख्या सबसे ज्यादा है. कहा जा रहा है कि एक-एक नाम पर 10 से 15 बीएस- 4 वाहन खरीदे गए हैं. दैनिक हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक, गोरखपुर में 20 एजेंसी मालिकों ने 2000 हजार से ज्यादा वाहन खुद ही खरीदे हैं.
बिहार में डिलरों ने करीब 400 वाहनों का अपने नाम पर रजिस्ट्रेशन कराया है
जानकारी के मुताबिक, ऐसा सिर्फ गोरखपुर में ही एजेंसी मालिकों ने नहीं किया है. बल्कि कानपुर और वाराणसी सहित अन्य जिलों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं. खबर है कि गोरखपुर के आरटीओ ऑफिस में जब एक-एक नाम पते पर 10 से 15 बाइक रजिस्ट्रेशन की फाइलें पहुंची तो कर्मचारी भी चौंक गए. उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड और उत्तराखंड में भी इस तरह के मामले सामने आए हैं. जानकारी के मुताबिक, बिहार में वाहन डिलरों ने करीब 400 बीएस- 4 वाहनों का अपने नाम पर रजिस्ट्रेशन कराया है. वहीं, झारखंड के रांची और जमशेदपुर में अब बीएस-4 चार पहिया वाहनों का स्टॉक नहीं बचा है. इसी तरह देहरादून में बीएस-4 वाहनों में 800 बाइक और 150 कार का स्टॉक बचा हुआ है. यहां भी डिलरों ने अपने-अपने नाम पर गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन करवा लिया है.
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ये है मामला- दरअसल, शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि बीएस-4 मानक के सभी वाहनों को 31 मार्च तक बेच देना है. इसी बीच 22 मार्च के बाद से लॉकडाउन घोषित हो गया. यही वजह है कि बिक्री न होने के चलते डिलरों ने खुद के नाम पर गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन करवा लिया. क्योंकि शीर्ष कोर्ट के आदेश के मुताबिक, 31 मार्च तक सेल लेटर जारी नहीं करते तो उन्हें शोरूम में फंसे कोरोड़ों की कीमत के वाहन कबाड़ में बेचने पड़ते. एजेंसियों में बजाज, होंडा, हीरो और टीवीएस के अलावा कई कंपनियों के ऐसे वाहन फंसे थे, जो कम बिकते हैं. हालांकि, लॉकडाउन के बाद अदालत ने 10 फीसदी वाहन बेचने की छूट दे दी है, लेकिन एजेंसी मालिक रिस्क लेने को तैयार नहीं थे.
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