यह मरकज से निकली कैसी जमात है?  उजड़ रहा चमन और बिखरी हयात है


गत 25 मार्च को जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उपराज्यपाल अनिल बैजल के साथ देश में लागू लाॅकडाऊन पर एक संवाददाता सम्मेलन कर रहे थे! तब उन्होने दिल्ली राज्य के लोगों को आशस्वत करते हुये कहा कि दिल्ली के लोगों को लाॅकडाऊन में घबड़ाने की जरुरत नहीं है! दिल्ली की सरकार विपदा की इस घड़ी में उनके साथ खड़ी है और किसी प्रकार की जरुरत की चीजों और रसद की कोई कमी नहीं आगे देगी! केजरीवाल ने इसके साथ ही बड़े आत्म विश्वास के लहजे में दिल्ली की जनता को संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से कहा कि यह बहुत ही अच्छी खबर है कि गत 40 घण्टों में दिल्ली के अंदर करोनो वायरस से संक्रमित कोई मामला नहीं आया है! ऐसा कहते समय वे इसका श्रेय खुद या अपनी सरकार को देते दिखे, मानो वे कह रहे थे कि हमारी सरकार की मुस्तैदी के कारण ही कोई मरीज 40 घण्टों में नहीं आया! मगर मुख्यमंत्री केजरीवाल की ये खुशी मात्र कुछ घण्टों में उस समय उड़ गई, जब 29 मार्च को साउथ दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन थाने की एन नाक नीचे मौजुद अलामी मरकज बंग्लेवाली मस्जिद में से करीबन 1500 तब्गीली जमातियों को पुलिस ने जबरन निकाला! जब इन जमातियों का टेस्ट हुया तो इनमें से 53 जानलेवा कोरोना के संक्रमित पाये गये! सारे देश में हड़कम्प मच गया, जो हिंदुस्तान देश में बढ़ते मरीजों की संख्या काफी कम होने पर कहीं न कहीं ईश्वर को धन्यवाद दे रहा था वो अचानक भय और गुस्से से आंक्रांत हो गया! भय और गुस्से का दूसरा कारण यह भी था कि 1500 इस मकरज में निकले वे तो अब सामने थे मगर इससे पहले धर्म और जमात में सम्मलित होने यहां मरकज में आये करीब 1500 लोग देश के विभिन्न राज्यों में जाकर गुम हो गये! जिनके कारण मौतों का अदृष्य सरगना कोरोना वायरस के नंगे नाचने और तांडव करने का खतरा पैदा हो गया! स्थिति आज इतनी विकराल हो गई है कि पूरा देश इन जमाती जाहिलों के कारण कोरोने की खौफनाक नजरों की निशाने पर आ गया है, चारो तरफ सरकारें, पुलिस व स्वास्थ्य कर्मी इस मकरज से निकले जमातियों की खोज में लग गये हैं! 


इसके नकारात्मक परिणाम भी अब देश के सामने आने लग गये हैं, तेलेंगना में यहां गये 10 जमाती कोरोना वायरस से संक्रमित होकर मौत के मूंह में चले गये! असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, अंडमान,हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर ,उत्तराखण्ड,मप्र,राजस्थान, बिहार ,उत्तरप्रदेश भी इन जमातियों की चपैट आ गया और राजस्थान में तो आज कुल 21 मामले सामने आये और ये सभी 21 मामले इन्ही तब्लीगी जमातियों के हैं जो जमात में शामिल होकर वापिस राजस्थान लोटे हैं! ऐसे में प्रश्न उठता है की लाॅकडाऊन के शुरु होते ही केजरीवाल उस दिन कोई मामला न आता देख इतने गदगद हो गये कि दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज की गोद में पल रहे इन हजारों जीते जागते कोरोना वायरस पर अंकूश लगाना भूल गये? या फिर ये कोई सोची समझी योजना अथवा षड़यंत्र के तहत ही हो रहा था? जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने लाॅकडाऊन वाले संदेह में कह चुके थे कि अब 21दिन हमें घरों में रहना है सोशल डिस्टेंस का पालन करना है, तब ये मरकज और इसमें पल रहे कोरोना वायरस पर केजरीवाल सरकार और केन्द्रीय गुप्तचर संस्था की सफेद हाथी हो चली फोजें कहां थी? उनकी चाक-चौबंदी कहां पर ड्यूटी को अंजाम दे रही थीं? अगर आज देश चिंतित है तो इसका कारण जिम्मेदारों का पलायन करना है! अब कहां है वो मौलाना साद जिसने इतना बड़ा धार्मिक जलसा बिना किसी सरकारी अनुमति से आयोजित कर पूरे देश को मौत के मुहाने पर खड़ा कर दिया! क्यों वो अभी तक कानून के सींखचों से नदारत और फरार है!त्योंहारों का महिना होने के बावजूद होली जैसे बड़े त्योंहारों लेकर अब तक रामनवमी तक हिंदू कार्यक्रम मात्र इसलिए रद्द कर दिये कि हमारे प्रधानमंत्री ने कहा है कि घरों से मत निकलो और सोशल डिस्टेंस अपनाओ तो फिर जाहिल और गंवारी हरकत करने वाला मौलाना साद कैसे इतना बड़ा जानलेवा कार्यक्रम कर फरार हो गया? देश चाहता है  कि इसकी निशपच्छ जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा! अगर मान लिया जाये कि मरकज में सालभर में होने वाला ये जलशा सजोंग है तो इंदौर, (मप्र) बस्ती, बिहार, झाड़खण्ड और उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बस्तियों में जाकर इन जमातियों के सम्पर्क में आने वालों की जांच करने वाले स्वास्थ कर्मियों और पुलिस पर हुये हमलों को संजोग किसी ऐंगल से नहीं माना जा सकता! ऐसा अक्सर सिर्फ षड़यत्रों व भड़काने पर ही होता है! गाजियाबाद एमएमजी अस्पताल में भर्ती इन चंद्र जमातियों की हरकत भी बर्दास्त ऐ काबिल नहीं है जो वहां क्वेराटाइन पर हैं, इन्हें सबक सिखाना ही हिन्दुस्तान का कानून है जिसका पालन करना प्रत्येक हिंदुस्तानियों का फर्ज है! 


 


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