कोरोना की वजह से 6 लाख लोग शेल्टर में गुजार रहे है जिंदगी,लाखों लोगों को NGO खिला रही है खाना







नई दिल्ली ।
लॉकडाउन के कारण देश में जो जहां है वहां ही थम गया है. देश में लाखों ऐसे मजदूर हैं जो इस वक्त सरकारी या प्राइवेट कैंप में अपनी जिंदगी बिताने को मजबूर हैं. इन्हीं को लेकर एक आंकड़ा सामने आया है.
  
कोरोना वायरस के संकट से देश में लॉकडाउन6 लाख से अधिक लोग सरकारी शेल्टरों में मौजूदप्रवासी मजदूरों को लेकर आई थीं कई दिक्कतें
कोरोना वायरस के महासंकट से भारत इस वक्त जूझ रहा है. इसी को मात देने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन लागू किया गया है. जब लॉकडाउन का ऐलान हुआ था, तब सबसे अधिक मुश्किल प्रवासी मजदूर, रिक्शा चालकों समेत अन्य गरीब वर्ग के लोगों की आई. सरकार के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, लॉकडाउन में अबतक करीब 54 लाख लोगों को केंद्र-राज्य सरकार के द्वारा खाना खिलाने का दावा किया जा रहा है.


देश के अलग-अलग राज्यों में लॉकडाउन के बाद आए संकट के बीच लाखों की संख्या में मजदूर घर वापसी के लिए निकले थे. तब केंद्र के द्वारा सभी राज्यों को कहा गया था कि शेल्टर होम, खाने और रहने की व्यवस्था की जानी चाहिए.


जो ताजा आंकड़े सामने आए हैं उनके मुताबिक, 22 हजार से अधिक कैंप सरकारों के द्वारा और करीब 4 हजार कैंप एनजीओ द्वारा अलग-अलग राज्यों में चलाए जा रहे हैं. इनमें 6 लाख से अधिक लोग सरकारी शेल्टरों में रुके हुए हैं, जबकि NGO द्वारा बनाए गए राहत कैंप में चार लाख लोग रुके हुए हैं. उत्तर प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में सर्वाधिक कैंप बनाए गए हैं.


 


वहीं, अगर भोजन की बात करें तो देश में 7 हजार से अधिक खाने के कैंप सरकारों और 9 हजार के करीब कैंप एनजीओ द्वारा लगाए गए हैं. इनमें 54 लाख से अधिक लोग सरकारी कैंपों में और 30 लाख से अधिक लोग एनजीओ की मदद से खाना खा चुके हैं. ये मदद लगातार जारी है, सिर्फ कैंप ही नहीं कई जगह लोगों को अन्य इलाकों में भोजन मुहैया कराया जा रहा है.



इतना ही नहीं, कई कंपनी-इंडस्ट्री ऐसी हैं जिन्होंने अपने यहां काम कर रहे कर्मचारियों, मजदूरों या उनके परिवारों के लिए मदद पहुंचाई है. ऐसे करीब 15 लाख लोग हैं जब कंपनियों के द्वारा दी जा रही मदद के सहारे हैं.


आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा जब लॉकडाउन का ऐलान किया गया था, तब अचानक भगदड़ की स्थिति देखने को मिली थी. दिल्ली-उत्तर प्रदेश बॉर्डर, महाराष्ट्र-गुजरात समेत कई राज्यों से प्रवासी मजदूर अपने घर जाने को बेताब थे.







 

 

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