महुली पुलिस को गरीब मजदूर से ही शान्ति भंग की आशंका आखिर क्यों है":-अरशद अली की रिपोर्ट


धनघटा-सन्त कबीर नगर।


पुलिस प्रशासन अपनी विश्वसनीयता और शान्ति व्यवस्था कायम रखने के लिए सुसंगत धाराओं का दुरुपयोग तो कर नहीं सकती है।
लेकिन संशय तब उत्पन्न हो जाता है ,जब कोई बेचारा ,ग़रीब , मजदूरी करने वाला व्यक्ति अनायास ही धारा 151/107/116/की चपेट में आ जाता है।
इसी तरह का एक मामला ग्राम पंचायत मड़हा राजा के पूरब टोला निवासी दलित हरिश्चंद्र पुत्र अधारे व उनकी ग्राम पंचायत सदस्या पत्नी सुनरा देवी पत्नी हरिश्चंद्र के साथ पेश आया।
पीड़ित का आरोप है कि बीते शनिवार को थाना महुली से उसे और पत्नी को धारा 107,116,151की नोटिस थमा उपजिलाधिकारी के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है।
जिसे देखकर दोनों पति- पत्नी भौंचक रह गये कि आखिर हम दोनों पर शान्ति व्यवस्था में व्यवधान डालने का पुलिस प्रशासन पर संशय क्यों उत्पन्न हो गया है?
क्या पुलिस को ग़रीब , मजदूर और मजबूर लोगों से ही शान्ति भंग की आशंका है?
कहीं ग्राम प्रधान के विरूद्ध शिकायत न करने का, दबाव व हतोत्साहित करने का नया तरीक़ा तो नहीं है।
पुलिस प्रशासन का इस तरह की धाराओं की आड़ में मजदूर व मजबूर लोगों को उलझाना न्याय हित में नहीं है।
धाराएं कानून का अनुपालन कराने के लिए हैं नकि जबरन किसी निर्दोष पर थोपने के लिए।


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